जोहार हिंदुस्तान | चंदवा/लातेहार: जिले के चंदवा प्रखंड अंतर्गत कामता पंचायत के चटुआग स्थित आदिम जनजाति (पीवीटीजी) परहैया टोला आज भी विकास की मुख्यधारा से काफी पीछे है। प्रधानमंत्री आवास, उज्ज्वला योजना, सामाजिक सुरक्षा पेंशन, स्वास्थ्य कार्ड, शुद्ध पेयजल और बेहतर सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं के अभाव में ग्रामीण बदहाल जीवन जीने को मजबूर हैं। इन समस्याओं को लेकर पंचायत समिति सदस्य अयुब खान ने रविवार रात गांव में रात्रि पड़ाव किया। इससे पहले उन्होंने पूरे गांव का भ्रमण कर ग्रामीणों से मुलाकात की और उनकी समस्याओं को विस्तार से सुना। इसके बाद स्कूल परिसर में ग्रामीणों के साथ बैठक कर गांव के समग्र विकास के लिए डीएमएफटी (जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट) मद से विशेष योजना लागू करने की मांग उठाई।
भ्रमण के दौरान सामने आया कि जेठनी देवी और उनके पति राजू परहैया का घर जर्जर हो चुका है। मजबूरी में वे कई वर्षों से अपने भाई विजय परहैया के घर में परिवार सहित रह रहे हैं। सात सदस्यीय परिवार में दो बच्चे बालिग हो चुके हैं, लेकिन अपना घर नहीं होने के कारण उनके विवाह तक नहीं हो पा रहे हैं। दंपती ने बताया कि हर माता-पिता की तरह उनका भी सपना है कि वे अपने बेटे-बेटी की शादी धूमधाम से करें, लेकिन आवास नहीं होने के कारण उनका यह सपना अधूरा रह गया है।
गांव में पेयजल की स्थिति भी बेहद चिंताजनक है। कई परिवार आज भी नदी किनारे बने चुआं (चुआंड़ी) का दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। गांव में एक जलमीनार जरूर है, लेकिन उससे सभी घरों तक पानी की आपूर्ति नहीं हो पाती। गर्मी के दिनों में पानी के लिए लोगों को काफी मशक्कत करनी पड़ती है।
ग्रामीणों ने बताया कि आज भी गांव के कई घरों तक बिजली के खंभे नहीं पहुंचे हैं, जिसके कारण अनेक परिवार बिजली जैसी मूलभूत सुविधा से वंचित हैं।
स्कूल जाने का रास्ता बना खतरे का रास्ता
परहैया टोला स्थित उत्क्रमित प्राथमिक विद्यालय तक पहुंचने वाली सड़क वर्षों से जर्जर पड़ी है। लगभग दस वर्ष पहले बनी ग्रेड-वन सड़क पूरी तरह टूट चुकी है। रास्ते के दोनों ओर घनी झाड़ियां और ऊंची घास उग आने से यह पहचानना मुश्किल हो जाता है कि यह विद्यालय का मार्ग है। बीच में एक नाला पड़ता है, जहां पुल नहीं होने से बच्चे जान जोखिम में डालकर नाला पार करते हैं। कई बार बच्चों का जहरीले सांपों से सामना भी हो चुका है। इसके बावजूद छात्र-छात्राएं रोज इसी रास्ते से स्कूल जाने को विवश हैं।
सड़क खराब, गांव तक नहीं पहुंचती एम्बुलेंस
ग्रामीणों ने बताया कि गांव तक जाने वाली सड़क खराब होने के कारण 108 एम्बुलेंस सेवा गांव में प्रवेश नहीं कर पाती। एम्बुलेंस मुख्य सड़क पर ही रुक जाती है और गंभीर मरीजों को खाट या डोली के सहारे आधा किलोमीटर से अधिक दूरी तय कर मुख्य सड़क तक लाना पड़ता है। इससे आपातकालीन स्थिति में मरीजों की जान पर खतरा बना रहता है।
सरकारी योजनाओं से वंचित दर्जनों परिवार
गांव के दर्जनों परिवार आज भी प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना, सामाजिक सुरक्षा पेंशन, राशन कार्ड, आयुष्मान स्वास्थ्य कार्ड तथा प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी महत्वपूर्ण सरकारी योजनाओं से वंचित हैं। वहीं रोजगार के अभाव में लगभग 80 प्रतिशत परहैया परिवारों को दूसरे राज्यों में पलायन करना पड़ता है।
डीएमएफटी मद से हो समग्र विकास : अयुब खान
पंचायत समिति सदस्य अयुब खान ने कहा कि आदिम जनजाति बहुल इस गांव की स्थिति अत्यंत चिंताजनक है। यहां विकास की बुनियादी सुविधाएं आज भी लोगों तक नहीं पहुंची हैं। उन्होंने मांग की कि डीएमएफटी मद से गांव की सड़क, पेयजल, बिजली, आवास और अन्य आधारभूत सुविधाओं का समग्र विकास कराया जाए। साथ ही गांव में विशेष शिविर लगाकर आयुष्मान स्वास्थ्य कार्ड, उज्ज्वला योजना, सामाजिक सुरक्षा पेंशन, राशन कार्ड तथा अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ मौके पर ही पात्र परिवारों को उपलब्ध कराया जाए।
उन्होंने उपायुक्त से मांग की कि परहैया टोला तक सड़क निर्माण का सर्वे शीघ्र कराकर निर्माण कार्य शुरू कराया जाए, ताकि ग्रामीणों को शिक्षा, स्वास्थ्य और आवागमन जैसी बुनियादी सुविधाएं मिल सकें।
रात्रि पड़ाव कार्यक्रम में दसवा परहैया, राजकुमार परहैया, सुरेंद्र परहैया, विजय परहैया, सनीका मुंडा, बुधराम बारला, अंकित परहैया, गबरेल मुंडा, ललु परहैया, कुसूम परहैया, विजय भेंगरा, विनोद परहैया, अजय परहैया, बंधु होरो, दिपेश टोपनो, अमीत भेंगरा, पौलूस टोपनो, राजकुमार भोगता सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।